हिन्दी गीत शीर्षक: घुंघरू की तरह
हिन्दी फ़िल्म : चोर मचाये शोर
गायकार : किशोर कुमार
घुंघरू की तरह
बजता ही रहा हूँ मैं
घुंघरू की तरह
बजता ही रहा हूँ मैं
कभी इस पग मे
कभी उस पग मैं
बंधता ही रहा हूँ मैं
घुंघरू की तरह
बजता ही रहा हूँ मैं
कभी टूट गया
कभी तोड़ा गया
सौ बार मूझे
फिर जोडा गया
कभी टूट गया
कभी तोड़ा गया
सौ बार मुझे
फिर जोडा गया
यूँही लूट लूट के और मिट मिट के
बनता ही रहा हूँ मैं
घुंघरू की तरह
बजता ही रहा हूँ मैं
मैं करता रहा
औरों की कही
मेरी बात मेरे
मन ही मे रही
मैं करता रहा
औरों की कही
मेरी बात मेरे
मन ही मे रही
कभी मंदिर मे
कभी महफिल मे
सजता ही रहा हूँ मैं
घुंघरू की तरह
बजता ही रहा हूँ मैं
अपनों मे रहे
या गैरों मे
घुंघरू की जगह
तो है पैरों मे
अपनों मे रहे
या गैरों मे
घुंघरू की जगह
तो है पैरों मे
फिर कैसा गिला
जग से जो मिला
सहता ही रहा हूँ मैं
घुंघरू की तरह
बजता ही रहा हूँ मैं
घुंघरू की तरह
बजता ही रहा हूँ मैं
बजता ही रहा हूँ मैं
Sunday, October 7, 2007
घुंघरू की तरह
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3 comments:
Bahut sundear rachana...wow thats great...
Really nice...
Regards..
DevSangeet
बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
bahut hi achha geet hai jiska koi jabab nahi iske andar bahut vedna chupi huee hai.
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